भारत ने रचा इतिहास  :ऑस्ट्रेलिया से जीती आस्ट्रेलिया में सीरीज़


करीब 71 सालों बाद भारतीय क्रिकेट टीम द्वारा आस्ट्रेलिया को आस्ट्रेलिया में हराकर सीरीज जीतना नि:संदेह एक  ऐतिहासिक उपलब्धि है। विराट कोहली के नेतृत्व वाली टीम इंडिया ने चार मैचों की टैस्ट शृंखला में 2.1 से जीत दर्ज की। सिडनी में चौथा टैस्ट बारिश के कारण ड्रा रहा, हालांकि उसमें भी भारत की स्थिति बहुत मजबूत थी। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि यह संयोग की जीत है। ऑस्ट्रेलिया पहली पारी में 322 रन से पिछड़ने के बाद फॉलोऑन कर रही थी। भारत ने पहला व तीसरा टैस्ट मैच जीता, जबकि ऑस्ट्रेलिया ने दूसरे टैस्ट में जीत दर्ज की, इस प्रकार भारत ने बॉर्डर-गावस्कर ट्राफी को अपने पास रखा। अब भारत ने दक्षिण अफ्रीका को छोड़कर सभी टैस्ट खेलने वाले देशों से उनकी ही धरती पर सीरीज जीतने का गौरव प्राप्त कर लिया है। टैस्ट क्षेत्र में नये प्रवेश करने वाले दो देशों में से अफगानिस्तान में मैच आयोजित होते नहीं और आयरलैंड से मुकाबला हुआ नहीं है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि इस शृंखला में भारत ही अधिक बेहतर टीम थी। कोहली व उनके लड़कों ने ऑस्ट्रेलिया को खेल के प्रत्येक क्षेत्र में परास्त किया। शृृंखला में तीन शतक बनाने वाले चेतेश्वर पुजारा और ऋ षभ पंत ने यह सुनिश्चित किया कि सलामी बल्लेबाजों की निरंतर विफ लता के बावजूद भारतीय टीम बड़ा स्कोर खड़ा करती रहे। पंत भारत की ओर से ऑस्ट्रेलिया में शतक लगाने वाले पहले विकेटकीपर बल्लेबाज़ बने। लेकिन इस टूर पर वास्तविक निर्णायक भूमिका भारत की तेज़ गेंदबाज़ी की तिकड़ी जसप्रीत बुमराह, मुहम्मद शमी व ईशांत शर्मा ने निभाई। इन तीनों ने ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाजों को निरंतर परेशान किया और सामूहिक रूप से 2018 में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बने। चूंकि पिछले साल दक्षिण अफ्रीका में गेंद के साथ  छेड़छाड़ करने के कारण स्टीव स्मिथ व डेविड वार्नर जैसे दिगज्ज खिलाड़ियों को टीम से निलम्बित कर दिया गया था, जिससे ऑस्ट्रेलिया की टीम वास्तव में काफी हद तक बिखर गई है। इसके बावजूद ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में हराना कोई मज़ाक नहीं है और इस कठिन कार्य को विराट एंड कंपनी ने अपनी आक्रामकता व आत्मविश्वास से कर दिखाया। जीत की इस मानसिकता के चलते इस टीम ने इस दाग को धो दिया है कि भारत सिर्फ घर में ही स्पिन लेती विकेटों पर शेर है। इस आरोप को भी निरस्त किया कि भारतीय बल्लेबाज़ केवल सपाट पिचों पर ही खेल सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में हराना निश्चित रूप से भारतीय क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक पल है। इस शृंखला में भारत का पलड़ा कितना भारी रहा, इस बात का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि 1988 के बाद यानी 31 वर्ष बाद ऑस्ट्रेलिया को अपने ही घर में फॉलोऑन खेलना पड़ा। सिडनी टैस्ट से पहले ऑस्ट्रेलिया ने अपने घर में लगातार 172 टैस्ट बिना फॉलोऑन के खेले, जिनमें से उसने 113 में जीत दर्ज की। 25 हारे व 34 ड्रा किये। इससे पहले 1986-87 में ब्रिसबेन में एशेज सीरीज के दौरान ऑस्ट्रेलिया को घर में फॉलोऑन खेलना पड़ा था। हालांकि भारत चाहता तो पिछले मैच में भी आस्ट्रेलिया को फॉलोऑन खिला सकता था। विराट द्वारा आस्ट्रेलिया को फॉलोऑन न खिलाये जाने की काफी आलोचना भी हुई थी। गौरतलब है कि विराट कोहली ने अपनी कप्तानी में अब तक छह बार विपक्षी टीम को फॉलोऑन दिया है, जिनमें से बांग्लादेश (उतुल्लाह, 2015 व ऑस्ट्रेलिया,सिडनी,  2018-19 के साथ मैच बारिश के कारण ड्रा रहे, जबकि वेस्ट इंडीज (एंटीगुआ) 2016 श्रीलंका कोलम्बो व पल्लेकेले, 2017 और वेस्ट इंडीज राजकोट 2018-9 के विरुद्ध भारत ने पारी के अंतर से जीतें दर्ज की थीं।  पुजारा निश्चित रूप से इस शृंखला का दोनों टीमों के बीच का अंतर थे। पुजारा ने इस सीरीज में 1258 गेंदों का सामना किया, जो चार टैस्टों के हिसाब से विश्व में चौथे नंबर पर है।  इस संदर्भ में रिकॉर्ड वेस्ट इंडीज के रिची रिचर्डसन का है, जिन्होंने 1988-89 में भारत के खिलाफ  सात पारियों में 619 रन औसत 88.42 बनाते हुए 1358 गेंदों का सामना किया था। पुजारा ने इस सीरीज में उच्चतम 193 के साथ तीन शतक लगाये। यह विदेशों में पुजारा का सबसे अच्छा स्कोर है,जबकि इससे पहले 153 था, जो उन्होंने दिसम्बर 2013 में दक्षिण अफ्रीका में बनाये थे। इसके अतिरिक्त पुजारा के घर पर तीन दोहरे शतक भी हैं। टैस्ट क्रिकेट बुनियादी तौर पर गेंदबाजों का खेल है। अगर गेंदबाज़ 20 विकेट नहीं लेंगे तो बल्लेबाज़ चाहे जितना भी स्कोर खड़ा कर दें जीत हासिल नहीं हो सकती।  इसलिए यह कहना गलत न होगा कि भारतीय तेज़ गेंदबाजों ने वास्तव में इस खेल में कमाल किया। उन्होंने योजना के तहत ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाजों को कट व पुल करने का अवसर ही नहीं दिया। योजना एक बात होती है और उसे लागू करना दूसरी बात होती है। जसप्रीत बुमराह, मुहम्मद शमी व ईशांत शर्मा की तिकड़ी ने यकीनन योजना को आशा से भी अधिक खूबी से अंजाम दिया। (इमेज रिफलैक्शन सैंटर)