पंजाबी को अनिवार्य विषय बनाए बिना  10वीं का सर्टीफिकेट न देने की मांग


चंडीगढ़, 2 जनवरी (सुरजीत सिंह सत्ती): पंजाब में पंजाबी को अनिवार्य विषय के तौर पर पास किए बिना 10वीं का सर्टीफिकेट जारी न करने के लिए बकायदा कानून होने के बावजूद सी.बी.एस.ई. व आई.सी.एस.ई. से संबंधित स्कूल इस राज्य की मातृ भाषा को अनिवार्य विषय नहीं मानते। इस कारण अब मुख्य सचिव पंजाब, कौंसिल फॉर इंडियन स्कूल सर्टीफिकेट इग्जामीनेशन, सी.बी.एस.ई. एक कानूनी नोटिस भेजकर कहा गया है कि यदि एक माह में पंजाब में मौजूद उक्त केन्द्रीय स्कूल बोर्डों के साथ एफीलीएटिड स्कूल में 10वीं में पजाबी को अनिवार्य विषय न बनाया गया तो लोकहित याचिका दाखिल करके हाईकोर्ट तक पहुंच की जाएगी। एडवोकेट हरीचंद अरोड़ा ने नोटिस भेजकर उपरोक्त अथारिटियों का ध्यान दिलाया है कि पंजाब में पंजाब लर्निंग ऑफ पंजाबी एण्ड लैगुएजिज़ एक्ट 2008 की सैक्शन-3 में यकीनी बनाया गया है कि राज्य के सभी स्कूलों में अकादमिक वर्ष 2009-10 से पंजाबी विषय पहली से दसवीं कक्षा तक अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाए। इसके साथ ही यह तजवीज़ भी बनाई गई है कि कोई शिक्षा बोर्ड या संस्था पंजाब के स्कूलों में पढ़ते किसी भी विद्यार्थी को दसवीं का सर्टीफिकेट तब तक जारी नहीं करेगी, जब तक वह दसवीं कक्षा में पंजाबी विषय को अनिवार्य विषय के रूप में पास नहीं करता। उपरोक्त एक्ट व इसकी तजवीज़ों के हवाले से कानूनी नोटिस में आरोप लगाया गया है कि राज्य में मौजूद सी.बी.एस.ई. व आई.सी.एस.ई. से एफीलिएटड स्कूल दसवीं में पंजाबी विषय को विकल्पिक विषय के रूप में पास करवा रहे हैं और दसवीं के कुल अंकों में पंजाबी विषय के अंक नहीं जोड़े जाते और दसवीं के सर्टीफिकेट दिए जा रहे हैं।