एसपीजी सुरक्षा : हंगामा क्यों कर रही है कांग्रेस ?


हाल के सालों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार देश से वीआईपी कल्चर को खत्म करने की बात करते रहे हैं। इसकी शुरूआत उन्होंने अपने ही मंत्रियों और नेताओं की गाड़ी से लाल बत्ती व हूटर हटवाकर की थी। अब अगली कड़ी की शुरुआत में देश के सबसे वीआईपी गांधी परिवार को भी इसकी जद में किसी हद एसपीजी सुरक्षा खत्म करके लाया गया है। गौरतलब है कि एसपीजी का गठन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद किया गया था। गांधी परिवार एकमात्र फैमिली है जिसे इसके गठन के बाद से ही स्थाई तौरपर यह  सुरक्षा मिली हुई थी, अब चूंकि वीआईपी कल्चर को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार लगातार इसके प्रतीकों में कटौती कर रही है, इसी क्रम में केंद्र सरकार ने अब गांधी परिवार से एसपीजी सुरक्षा हटाने का बड़ा फैसला लिया है।
गांधी परिवार को अब सीआरपीएफ  की जेड प्लास कैटेगरी की सुरक्षा देने का निर्णय लिया गया है, हालांकि कांग्रेस इस फैसले से सरकार पर हमलावर है, लेकिन राहुल गांधी एक अर्से से कहते रहे हैं कि उन्हें वीआईपी ट्रीटमेंट नहीं चाहिए, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने इस पर राजनीतिक हंगामा खड़ा कर दिया है। सवाल है क्या गांधी परिवार की सुरक्षा खत्म कर दी गयी है? ऐसा तो नहीं हुआ। उन्हें जेड प्लस की सुरक्षा अब भी मिली हुई है। सवाल है एसपीजी सुरक्षा ही क्यों? क्योंकि इससे सोशल ठसक बनती है। मालूम हो कि वीआईपी को दी जाने वाली सुरक्षा का मामला केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आता है। एसपीजी, इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के एक सह विभाग के रूप में काम करती है।
 गृह मंत्रालय समय-समय पर वीआईपी सुरक्षा की समीक्षा करता रहा है। इसके मुताबिक सुरक्षा को नियमित अंतराल पर घटाया या बढ़ाया जाता है। गांधी परिवार से एसपीजी सुरक्षा हटाने से पहले केंद्र सरकार, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की एसपीजी सुरक्षा भी हटा चुकी है। इसकी जगह उन्हें भी जेड प्लस सुरक्षा दी गई है, लेकिन कांग्रेस ने तब हंगामा खड़ा नहीं किया। मालूम हो कि वीआईपी सुरक्षा के लिए देश में एसपीजी के अलावा एक्सएवाई, जेड और जेड प्लस   कैटेगरी की सुरक्षा की व्यवस्था है। जहां तक स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (विशेष सुरक्षा दल) या एसपीजी की बात है तो यह देश का एक अतिविशिष्ट सुरक्षा बल है।
एसपीजी की सुरक्षा प्रधानमंत्री, उनके परिवार, पूर्व प्रधानमंत्री और पूर्व राष्ट्रपति को अब तक मिलती रही है। पूर्व प्रधानमंत्रियों और उनके परिवार को पद छोड़ने के बाद एक वर्ष तक एसपीजी सुरक्षा देने का प्रावधान है। एसपीजी प्रधानमंत्री को 24 घंटे विशेष सुरक्षा घेरे में रखती है। पीएम के अलावा उनके आवास, विमान, कार्यालय, वाहन जैसे उनके संभावित भ्रमण स्थलों सभी की सुरक्षा की जिम्मेदारी एसपीजी की होती है। इसके लिए एसपीजी को विशेष प्रशिक्षण और विशेष संसाधन मुहैया कराए जाते हैं। प्रधानमंत्री देश के अंदर हो या विदेश में एसपीजी हर वक्त साए की तरह उनके साथ रहती है।
एसपीजी का गठन वर्ष 1988 में किया गया था। इसके गठन का उद्देश्य ही प्रधानमंत्री और उनके परिवार समेत विशिष्ट लोगों को खास सुरक्षा प्रदान करना था। इसकी आवश्यकता पहली बार वर्ष 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद महसूस की गई थी। इसके बाद आईबी के एक विभाग के तौरपर सीधे केंद्र सरकार के अंतर्गत एक विशेष सुरक्षा दल के गठन का फैसला लिया गया था। एसपीजी के गठन से पहले प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस की एक विशेष शाखा के पास थी। नि:संदेह यह देश की सबसे उच्च स्तर की सुरक्षा फोर्स है, जो बहुत सीमित लोगों को प्रदान की जाती है।
एसपीजी की सुरक्षा चार स्तर की होती है। अभी हाल तक  एसपीजी की सुरक्षा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उनके बेटे और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और बेटी प्रियंका गांधी को प्राप्त है। प्रधानमंत्री और पूर्व प्रधानमंत्री व पूर्व राष्ट्रपति के अलावा एकमात्र गांधी परिवार को ही ये सुरक्षा वर्षों से स्थाई तौर पर मिली हुई थी, जिसे अब खत्म किये जाने का निर्णय लिया गया है। इसी क्रम में जेड प्लस सुरक्षा देश में दूसरे कैटेगरी की वीआईपी सुरक्षा है। जेड प्लस तीन स्तर की सुरक्षा होती है। इसके तहत कुल 36 सुरक्षाकर्मी मिलते हैं। इनमें 10 एनएसजी के विशेष कमांडो होते हैं। जो पहले घेरे अथवा प्रथम स्तर की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हैं। इसके बाद एनएसजी के अन्य जवान दूसरे लेयर की सुरक्षा संभालते हैं। तीसरे घेरे की जिम्मेदारी अर्धसैनिक बलों जैसे आईटीबीपी, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ  आदि के जवानों को शामिल किया जाता है।
जेड प्लस सुरक्षा आम तौर पर उन्हीं केंद्रीय मंत्रियों या विशिष्ट अतिथियों को दी जाती है, जिन्हें आतंकी खतरा हो जबकि जेड श्रेणी की सुरक्षा, जो कि देश में तीसरे नंबर की सबसे वीआईपी सुरक्षा होती है, जेड सुरक्षा में कुल 22 जवान होते हैं। इनमें से चार-पांच एनएसजी के विशेष कमांडो होते हैं, यह सुरक्षा भी विशेष श्रेणी के वीआईपी लोगों को दी जाती है। इस सुरक्षा के कर्मी कई किस्म की करीबी लड़ाईयों की कला में पारंगत होते हैं। ये कमांडो बिना हथियार के भी दुश्मन का मुकाबना करने में माहिर होते हैं। इसके लिए इन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। इस श्रेणी की सुरक्षा में एक एस्कॉर्ट वाहन भी सुरक्षा में शामिल होता है। एनएसजी कमांडो टुकड़ी के अलावा जेड सुरक्षा में दिल्ली पुलिस या सीआरपीएफ  के जवानों को भी शामिल किया जाता है।
जहां तक वाई श्रेणी की सुरक्षा का सवाल है तो यह वीआईपी सुरक्षा क्रम में भले चौथे स्थान पर आती हो लेकिन यह भी बहुत महत्वपूर्र्ण है। ज्यादातर वीआईपी को गृह मंत्रालय की तरफ  से वाई श्रेणी की ही सुरक्षा मुहैया कराई जाती है। इसमें कुल 11 जवान शामिल होते हैं। इसमें एक या दो कमांडों, दो पीएसओ और शेष अर्द्ध-सैनिक बलों के जवान होते हैं। जबकि एक्स श्रेणी की सुरक्षा व्यवस्था में केवल दो सुरक्षाकर्मी शामिल होते हैं। इन्हीं में से एक पीएसओ भी होता है। यह आमतौर पर जब किसी सामान्य व्यक्ति को किसी खास वजह से सुरक्षा दी जाती है तो यही सुरक्षा दी जाती है।