देवी-देवताओं और उनके वाहनों के गुण


देवी देवताओं के चित्रों में हम देखते हैं कि वे किसी न किसी वाहन पर सवार हैं। यहां यह बात उल्लेखनीय है कि देवताओं-देवियों का जो गुण-स्वभाव है, वही गुण-स्वभाव लगभग उसके वाहन का भी होगा। पुराने समय में जानवर ही मनुष्य का वाहन होता था अत: जिसने भी देवी-देवताओं के लिए वाहन की कल्पना की होगी, उसने देवी-देवता और जानवरों के गुणों-आचरणों का तुलनात्मक अध्ययन किया होगा।
लक्ष्मी के बारे में माना जाता है कि छल-कपट व तीक्ष्ण बुद्धि से प्राप्त और मूर्खता से समाप्त होती है। उल्लू धूर्त्त, कपटी और मूर्ख भी है। वाहन के रूप में उल्लू लक्ष्मी जी को प्राप्त हो गया। चूहे बड़ी-बड़ी बाधाओं को पार कर अपने मतलब की चीजों तक पहुंच जाते हैं। गणेश को विघ्न विनाशक माना जाता है। इस तरह विघ्न विनाशक को साहसी चूहा वाहन के रूप में मिला। बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती का वाहन हंस है। हंस को बड़ा अक्लमंद, धीर-गंभीर और विनम्र माना जाता है। यही गुण सरस्वती में भी हैं। सरीसृपों में शेषनाग और पक्षियों मे गरुड़ को अति विशिष्ट माना गया है। इसी प्रकार देवताओं में लक्ष्मीपति विष्णु भी विशिष्ट माने गये हैं। इनकी विशिष्टता का ध्यान रखते हुए उन्हें शेषनाग और पक्षीराज गरुड़ वाहन के तौर पर प्रदान किये गये। गणेश के भाई कार्तिकेय घमंडी थे। मोर भी अपने सुंदर परों पर अभिमान करता है। यह घमंडी पक्षी घमंडी देवता कार्तिकेय को भेंट कर दिया गया। शेर साहसी और जुझारू होता है। जब वह दहाड़ता है तो तीव्र गर्जन करता है। शेर से हर कोई घबराता है। काली, महिषासुर मर्दिनी आदि तमाम नामाें से जानी जाने वाली दुर्गा में भी यही विशिष्टताएं हैं। इसलिए शेर उनका वाहन है।देवताओं के राजा इंद्र थे। शरीर के हिसाब से हाथी सब पर भारी पड़ता है। शायद इसीलिए देवराज इंद्र का वाहन हाथी है। गंगा वर्षा में बेकाबू होकर बस्तियों को मटियामेट कर अपने में समा लेती है। यही संहारक गुण मगरमच्छ में भी है। इसी कारण गंगा का वाहन मगरमच्छ है। भैंसा जब बिगड़ जाए तो सब कुछ तहस-नहस करने पर उतारू हो जाता है। यही कुछ यमराज का हाल था तो भेंसा उनका वाहन बना।यूनानी लोग मानते हैं कि गरुड़ वीर और कायाकल्प करने में समर्थ है  सर्प चालाक तथा दुष्ट होता है। यही गुण यूनानी देवता ‘जीअस’ और उनकी पत्नी ‘हेरा’ में थे। सो, उक्त दोनों जीअस तथा हेरा के वाहन बने। (उर्वशी)

—अयोध्या प्रसाद ‘भारती’