प्रसिद्ध धार्मिक स्थल माता बगलामुखी 


हिमाचल प्रदेश मंदिरों से भरा हुआ है। यहां पर काफी संख्या में भक्तजन हैं। हिमाचल प्रदेश को देवी-देवताओं की भूमि भी माना जाता है। यहां पर अनेक देवी-देवताओं के मंदिर हैं। जिनमें से एक है -माता बगलामुखी मंदिर। इस मंदिर का नाम ‘श्री 1008 बगलामुखी बनखंडी मंदिर’  है।   माता बगलामुखी का मंदिर कांगड़ा जिला के बनखंडी नामक स्थान में स्थित है। बगलामुखी मंदिर कांगडा जिले के एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। कई भक्त यहां हर रोज देवी बगलामुखी की पूजा करने आते हैं, जिन्हें हिंदू पौराणिक कथाओं में दस बुद्वि की देवी माना जाता है।  कांगड़ा के देहरा से मात्र 8 किलोमीटर, ज्वालामुखी से 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मां बगलामुखी का यह मंदिर हजारों साल पुराना है। माता बगलामुखी रावण की ईष्ट देवी हैं। यह मंदिर हिंदू धर्म के लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है। यह मंदिर महाभारत कालीन माना जाता है। पांडुलिपियों में मां के जिस स्वरूप का वर्णन है, मां उसी रूप में यहां विराजमान है। यह पीतवर्ण के वस्त्र, पीत आभूषण तथा पीले रंग के पुष्पों की ही माला धारण करती हैं। बगलामुखी जयंती पर यहां मेले का आयोजन किया जाता है। बगलामुखी जयंती पर हर साल हिमाचल प्रदेश के विभिन्न राज्यों से लोग आकर अपने कष्टों के निवारण  के लिए हवन, पूजा-पाठ करवाकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।  यहां पर  हिमाचल, पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों से श्रद्धालु मां के चरणों में शीश झुकाने के लिए आते हैं। माना जाता है कि यहां लोग दूर-दूर से हवन करवाने आते हैं, ताकि उनके कष्टों का नाश हो सके। हवन के लिए बुकिंग करवानी पड़ती है। माता बगलामुखी जी दस महाविद्या में आठवीं महाविद्या हैं।  हल्दी रंग के जल से इनका प्रकट होना बताया गया है। इन्हें माता पीताम्बरा भी कहते हैं। इनका प्रकाट्य स्थल गुजरात के सौरपट क्षेत्र में माना जाता है।  इनके भैरव महाकाल हैं। माता बगलामुखी का रंग स्वर्ण के समान पीला होता है।  उच्च पदस्थ अधिकारी, नेता, अभिनेता माता पीताम्बरी  की असीम अराधना से विजयश्री प्राप्त करते हैं। नवरात्र की पंचम से ही महाविद्या की पूजा अर्चना का क्रम आरम्भ हो जाता है। यह देवी राजयोग की देवी हैं। सत्य-असत्य इनके अधीन हैं। यह न्याय की देवी हैं। इनको अन्याय पसंद नहीं है। भारत में मां बगलामुखी के तीन ही प्रमुख ऐतिहासिक मंदिर माने गए हैं जो क्रमश: दतिया (मध्यप्रदेश) , कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) तथा नलखेड़ा (मध्यप्रदेश) में हैं। तीनों का अपना अलग- अलग महत्व है।  बगलामुखी जयंती पर मंदिर में हवन करवाने का विशेष महत्व है, जिससे कष्टों का निवारण होने के साथ-साथ भय से मुक्ति मिलती है। इनके पूजन में पीले रंग की सामग्री का प्रयोग सबसे ज्यादा होता है। पूजा में पीले रंग के फूलों का प्रयोग होता है। इनकी पूजा कभी भी किसी के नाश के लिए नहीं करनी चाहिए। द्रोणाचार्य, रावण,मेघनाद इत्यादि सभी महायोद्धाओं द्वारा माता बगलामुखी की आराधना करके युद्ध लड़े गए थे। नगरकोट के महाराजा संसार चंद कटोच भी प्राय:  इस मंदिर में आकर माता बगलामुखी की अराधना किया करते थे, जिनके आशीर्वाद से उन्होंने कई युद्धों में विजय पाई थी।

—जीवन धीमान
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