सेफ स्कूल वाहन पालिसी को लागू करने हेतु शिक्षा विभाग फिर हुआ सक्रिय


वरसोला, 18 अक्तूबर (वरिन्द्र सहोता): माननीय हाईकोर्ट द्वारा स्कूली विद्यार्थियों की सुरक्षा हेतु वर्ष 2014 में जारी की गई सेफ स्कूल वाहन पालिसी को पूर्ण रूप में लागू करना प्रशासन एवं विशेषकर शिक्षा विभाग हेतु एक चुनौती वाला कार्य बना हुआ है परन्तु माननीय हाईकोर्ट द्वारा इस सम्बन्धी अपनाए कड़े रवैये के कारण शिक्षा विभाग इस पालिसी को पूर्ण रूप से लागू करने हेतु एक बार फिर सक्रिय हुआ है। इसके तहत शिक्षा सचिव पंजाब द्वारा समूह ज़िला शिक्षा अधिकारियों को विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। जिला शिक्षा अधिकारियों को इस सम्बन्धी समूह निजी स्कूलों की मैनेजमैंटों एवं प्रमुखों के साथ विशेष बैठक करके इस बात को सुनिश्चित बनाने हेतु कहा गया है कि निजी स्कूल केवल उन बसों, वैनों या अन्य वाहनों में बच्चों को स्कूल लेकर आएं और घरों तक छोड़ने हेतु लगाएं जो सेफ स्कूल वाहन पालिसी के मापदंडों के अनुसार हों। इस बात को सुनिश्चित बनाया जाए कि स्कूल वाहन का रंग पीला हो, वाहन के पीछे और आगे ‘ऑन स्कूल ड्यूटी’ लिखा हो, वाहन में फर्स्ट ऐड किट एवं अग्निशमन यंत्र हो, खिड़कियां हाईड्रोलिक हों, स्कूल का नाम एवं टैलीफोन नम्बर लिखा हो, ड्राईवर का कम से कम पांच वर्षों का अनुभव हो, ड्राईवर का एक वर्ष तक कोई चालान न हुआ हो, वर्दी के साथ-साथ नाम वाली प्लेट भी लगाई हो, बच्चे सीटों के अनुसार ही बिठाए जाएं, यदि वाहन में कोई छात्रा जा रही है तो उसमें महिला अटैडैंट अवश्य हो, वाहन की स्पीड 25 किलोमीटर प्रति घंटा हो और वाहन के ड्राईवर या कंडक्टर को कोई गंभीर बीमारी न हो और न ही वह कोई नशा करता हो। इसके अतिरिक्त प्रत्येक स्कूल में एक स्कूल स्तर की ट्रांसपोर्ट कमेटी बनाना अनिवार्य करार दिया गया है। स्कूल प्रमुखों के नेतृत्व वाली इस कमेटी में क्षेत्र के एक ए.एस.आई., मोटर व्हीकल इंस्पैक्टर, सहायक जिला शिक्षा अधिकारियों एवं परिजनों द्वारा भी एक सदस्य को शामिल करना आवश्यक करार दिया गया है। दूसरी ओर इस सम्बन्धी बातचीत करते कुछ निजी स्कूलों के प्रबन्धकों ने कहा कि अनेक स्कूल ऐसे हैं, जिनमें परिजन अपने तौर पर कोई प्राइवेट वाहन में बच्चों को स्कूलों में भेज रहे हैं जोकि पालिसी के मापदंडों पर पूरे नहीं उतरते। इसलिए सेफ स्कूल वाहन पालिसी को लागू करने हेतु परिजनों एवं प्रशासन का सहयोग आवश्यक है।