पराली जलाने के मामले में जवाबदेही तय करने के आदेश


चंडीगढ़, 9 अक्तूबर (वार्ता) : पंजाब में धान के अवशेष जलाये जाने के विरुद्ध उठाए जा रहे कदमों को निचले स्तर से प्रभावी ढंग से अमल में लाने के लिए प्रदेश सरकार ने विभिन्न विभागों, बोर्ड, निगम, सहकारी सभाओं तथा स्वायत्त संस्थाओं के कर्मचारियों को इसमें शामिल करते हुए पराली जलाने के मामले में उनकी जवाबदेही तय करने का फैसला किया है। प्रदेश सरकार ने इस मामले में निर्देश जारी करते हुए सभी कर्मचारियों से कहा है कि उनके इलाके में किसी हालत में पराली को आग नहीं लगनी चाहिए। यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव काहन सिंह पन्नू ने आज यहां देते हुए बताया कि यदि कोई कर्मचारी इन हिदायतों की पालना नहीं करता तो उनके विरुद्ध सेवा नियमों के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि पराली जलाने से रोकने के लिए लोगों को भी जागरूक किया जाए क्योंकि यह पर्यावरण तथा स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। यदि कहीं पराली जलाने का कोई मामला सामने आता है तो वे तुरंत सम्बन्धित आथॉरिटी के नोटिस में लाएं। कृषि सचिव ने बताया कि राज्य सरकार ने ज़िला पुलिस प्रमुखों तथा अन्य पुलिस अफसरों को भी हिदायत दी है कि वे किसानों को पराली न जलाने के लिये दबाव बनाएं। सभी राजस्व पटवारियों को भी आदेश दिए गए हैं कि जिस खेत में भी पराली जलाई जाती है, उस ज़मीन की गिरदावरी में ‘रैड एंट्री’ दर्ज की जाए। उन्होंने कहा कि उपायुक्तों को निर्देश दिये हैं कि यदि कोई नंबरदार पराली जलाने की गतिविधि में शामिल पाया जाता है तो उसके विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए सम्बन्धित आथॉरिटी द्वारा नोटिस जारी किया जाए।